22 माह के शिशु पर दुर्लभ प्लाज़्माफेरेसिस प्रक्रिया सफल, बरेली मंडल में पहली बार बना नया चिकित्सा इतिहास

बरेली क्षेत्र के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (RMCH) के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने 22 माह के एक मासूम शिशु पर तीव्र यकृत विफलता (Acute Liver Failure) के उपचार हेतु चार चरणों में प्लाज़्माफेरेसिस (Plasmapheresis) प्रक्रिया सफलतापूर्वक सम्पन्न की। इतनी कम आयु के शिशु पर इस जटिल प्रक्रिया का सफल संचालन बरेली मंडल में पहली बार किया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, शिशुओं में तीव्र यकृत विफलता एक अत्यंत गंभीर एवं जानलेवा स्थिति होती है, जिसमें रोगी की हालत कुछ ही घंटों में तेजी से बिगड़ सकती है। ऐसे मामलों में प्लाज़्माफेरेसिस एक अत्याधुनिक एवं वैज्ञानिक उपचार पद्धति है, जिसके माध्यम से रक्त के प्लाज़्मा से विषैले तत्वों एवं सूजन उत्पन्न करने वाले पदार्थों को हटाकर उनकी जगह नया प्लाज़्मा डाला जाता है। इससे यकृत (लिवर) को स्वयं स्वस्थ होने अथवा आगे के उपचार के लिए आवश्यक समय मिल जाता है।
चिकित्सकों ने बताया कि 2 वर्ष से कम आयु के शिशु में इस प्रक्रिया को सुरक्षित रूप से करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि शिशु के शरीर में रक्त की मात्रा बहुत कम होती है तथा रक्त वाहिकाओं तक पहुंच बनाना तकनीकी रूप से कठिन होता है। ऐसी स्थिति में उच्च स्तरीय विशेषज्ञता एवं सतत निगरानी की आवश्यकता होती है।
यह जटिल प्रक्रिया नेफ्रोलॉजी विभाग के डॉ. तारकेश्वर गुप्ता तथा पीडियाट्रिक्स एवं पीडियाट्रिक सर्जरी के क्रिटिकल केयर विभाग की डॉ. अंशुमति सेठ के नेतृत्व में विशेषज्ञ चिकित्सकों की बहुविषयक टीम द्वारा सम्पन्न की गई। टीम में सुश्री ताशिया ज़ाहिद, डॉ. विभार्ग द्विवेदी, डॉ. स्वाति वर्मा, डॉ. प्रखर वर्मा, डॉ. सक्षम बंसल, डॉ. फैजुर रहमान एवं डॉ. मोहम्मद रिजवान सहित अन्य चिकित्सकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पूरी प्रक्रिया के चारों चरणों के दौरान शिशु की लगातार निगरानी की गई।
विशेषज्ञों ने बताया कि बच्चों में गंभीर यकृत रोग के लक्षणों की समय रहते पहचान कर ऐसे अस्पताल में शीघ्र पहुंचाना, जहां प्लाज़्माफेरेसिस जैसी उन्नत सुविधा उपलब्ध हो, रोगी के जीवन की रक्षा कर सकता है। समय पर उपचार मिलने से जटिलताओं को कम करने तथा रोगी के स्वस्थ होने की संभावना में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
अस्पताल प्रशासन ने इस सफलता को रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की आधुनिक क्रिटिकल केयर एवं सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं की बढ़ती क्षमता का प्रमाण बताया। साथ ही कहा कि इस उपलब्धि से बरेली उन्नत चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है, जिससे अब गंभीर मरीजों को उपचार के लिए दिल्ली अथवा लखनऊ जाने की आवश्यकता काफी हद तक कम होगी।”
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